प्राकृतिक चयन

प्राकृतिक चयन (Natural Selection) विकासवाद (Evolution) का वह मुख्य आधार है, जिसे चार्ल्स डार्विन ने दुनिया के सामने रखा था। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जीव अपनी बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालते हैं और जीवित रहते हैं।

यहाँ प्राकृतिक चयन के सिद्धांत और उसकी कार्यप्रणाली पर एक विस्तृत लेख दिया गया है:

प्राकृतिक चयन का सरल अर्थ है—“प्रकृति द्वारा सर्वोत्तम का चुनाव।” वह जीव जो अपने वातावरण में रहने और प्रजनन करने के लिए सबसे उपयुक्त गुणों को अपनाता है, वही जीवित रहता है और अपनी आने वाली पीढ़ियों को वे गुण सौंपता है।

1. प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया कैसे काम करती है?

डार्विन के अनुसार, प्राकृतिक चयन चार मुख्य चरणों में पूरा होता है:

  • विभिन्नता (Variation): एक ही प्रजाति के सभी जीव एक जैसे नहीं होते। उनके रंग, आकार या व्यवहार में थोड़े बदलाव होते हैं। ये बदलाव आनुवंशिक (Genetic) होते हैं।

  • अस्तित्व के लिए संघर्ष (Struggle for Existence): संसाधनों (भोजन, पानी, आवास) की कमी के कारण जीवों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है।

  • अनुकूलन और उत्तरजीविता (Survival of the Fittest): जिन जीवों में वातावरण के अनुकूल बेहतर गुण होते हैं (जैसे तेज दौड़ना या बेहतर छलावरण), उनके जीवित रहने की संभावना अधिक होती है।

  • वंशानुक्रम (Inheritance): जीवित बचे जीव प्रजनन करते हैं और अपने ‘अनुकूल’ गुणों को अगली पीढ़ी में स्थानांतरित करते हैं।

2. प्राकृतिक चयन के उदाहरण

प्राकृतिक चयन को समझने के लिए कुछ प्रसिद्ध उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

  • जिराफ की लंबी गर्दन: माना जाता है कि शुरुआत में सभी जिराफों की गर्दन लंबी नहीं थी। लेकिन जब जमीन की घास खत्म हुई, तो केवल लंबी गर्दन वाले जिराफ ही ऊंचे पेड़ों की पत्तियां खा सके। छोटी गर्दन वाले जिराफ जीवित नहीं रह पाए, और धीरे-धीरे केवल लंबी गर्दन वाले जिराफों की ही आबादी बची।

  • पेपरड मॉथ (Peppered Moth): इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति से पहले सफेद पतंगे अधिक थे क्योंकि वे पेड़ों के सफेद तनों पर छिप जाते थे। प्रदूषण के कारण जब पेड़ काले हो गए, तो काले पतंगे छिपने में बेहतर साबित हुए और उनकी संख्या बढ़ गई।

  • एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance): आज के समय में बैक्टीरिया पर दवाओं का असर कम हो रहा है। यह भी प्राकृतिक चयन है—जो बैक्टीरिया दवा को झेल लेते हैं, वे जीवित बचते हैं और अपनी संख्या बढ़ाते हैं।

3. प्राकृतिक चयन का महत्व

प्राकृतिक चयन केवल जीवित रहने के बारे में नहीं है, बल्कि यह जैव-विविधता (Biodiversity) के लिए भी जिम्मेदार है। इसी प्रक्रिया के कारण पृथ्वी पर लाखों अलग-अलग प्रजातियों का जन्म हुआ है। यह हमें सिखाता है कि परिवर्तन ही जीवन का नियम है और जो समय के साथ बदलता है, वही टिकता है।

प्राकृतिक चयन एक धीमी लेकिन निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह किसी बुद्धिमान योजना के तहत नहीं, बल्कि परिस्थितियों और आनुवंशिक संयोग के कारण होती है। डार्विन का यह सिद्धांत आज भी आधुनिक जीव विज्ञान की सबसे मजबूत नींव है।

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