Effect of Galwan Valley Conflict in Hindi

15 जून, 2020 की रात लद्दाख की गालवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प ने न केवल दोनों देशों के रिश्तों को हिलाकर रख दिया, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान दक्षिण एशिया की ओर खींच लिया। चार दशकों से अधिक समय के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर यह पहली ऐसी घटना थी जिसमें सैनिकों की जान गई।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

गालवान घाटी सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के Darbuk-Shyok-Daulat Beg Oldie (DSDBO) रोड के करीब है। चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिशों और बुनियादी ढांचे के निर्माण पर आपत्ति ने इस तनाव को जन्म दिया, जो अंततः एक हिंसक शारीरिक झड़प में बदल गया।

भारत पर इसके प्रमुख प्रभाव

गालवान संघर्ष के प्रभाव बहुआयामी रहे हैं, जिन्हें निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

1. सैन्य बदलाव

  • भारत ने LAC पर अपनी सैन्य उपस्थिति को स्थायी रूप से बढ़ा दिया है। अब वहां ‘मिरर डिप्लॉयमेंट’ (चीन के बराबर सैन्य बल) की नीति अपनाई जाती है।

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, पुलों और सुरंगों के निर्माण में तेजी आई है ताकि आपात स्थिति में सेना की पहुंच सुगम हो सके।

2. आर्थिक और व्यापारिक प्रभाव

भारत ने चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए कड़े कदम उठाए:

  • चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध: सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए TikTok, WeChat और सैकड़ों अन्य चीनी ऐप्स को प्रतिबंधित कर दिया गया।

  • एफडीआई (FDI) नियमों में बदलाव: पड़ोसी देशों (विशेषकर चीन) से आने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई।

  • आत्मनिर्भर भारत: ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति मिली ताकि चीनी आयात का विकल्प तैयार किया जा सके।

3. कूटनीतिक और वैश्विक संबंध

  • क्वॉड (QUAD) की मजबूती: भारत का झुकाव अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘क्वॉड’ गठबंधन की ओर बढ़ा है, जिसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना है।

  • चीन के प्रति अविश्वास: भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीमा पर शांति नहीं होगी, तब तक द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते।

निष्कर्ष

गालवान घाटी के संघर्ष ने भारत को अपनी विदेश नीति और रक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। आज भारत चीन के साथ अपनी सीमाओं पर पहले से कहीं अधिक सतर्क और तैयार है। यह घटना भारतीय इतिहास में साहस और संप्रभुता की रक्षा के एक प्रतीक के रूप में दर्ज रहेगी।

“सीमा पर शांति और स्थिरता ही द्विपक्षीय संबंधों के विकास का आधार है।” – भारत का आधिकारिक रुख

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *